संविधान सभा में नामकरण संस्कार" भारत / इंडिया" पर निर्णायक चर्चा -18 सितम्बर 1949

हमारे देश का नाम क्या हो? या यह कहे कि नामकरण संस्कार पर निर्णायक चर्चा  संविधान सभा में  18.09.1949 को हुई। जिसमें कई प्रकार के प्रस्ताव प्रस्तुत किये गये। एच.वी. कामथ का प्रस्ताव था कि भारत अथवा अंग्रेजी भाषा में इंडिया लिखा जावें। दूसरा विकल्प - हिन्द अथवा अंग्रेजी भाषा में इंडिया। बहस के दौरान कई नाम सुझाए गए जैसे - भारत, हिन्दूस्तान, हिन्द, भारतभूमि, भारतवर्ष चर्चा के दौरान वर्ष 1937 में पारित किए गए आयरलैण्ड के संविधान का उदाहरण दिया गया। जहां आयरलैण्ड स्वतंत्रता राज्य के संविधान का अनुच्छेद निम्न प्रकार है :-

‘‘राज्य का नाम एयर अथवा अंग्रेजी भाषा में आयरलैण्ड है।"

इस पर एच.वी. कामथ ने कहा कि उन्होंने अंग्रेजी भाषा पर विशेष जोर क्यों दिया। क्या सब यूरोप की भाषाओं में ऐसा नहीं है। ‘‘जर्मन शब्द इंडियन है और यूरोप के कई भागों में इस देश (भारत) का उल्लेख प्राचीनकाल के अनुसार हिन्दूस्तान के रूप में किया जाता है और भारत के सभी निवासियों को चाहे उनका धर्म कुछ भी हो हिन्दू कहा जाता है यूरोप के कई भागों में यह धारणा प्रचलित है कि यह शब्द सिन्धु नदी से लिया गया है और प्राचीन नाम हिन्दू के रूप में चला रहा है।’’ एच.वी. कामथ ने इंडिया अर्थात् भारत वाक्य रचना पर असहमति जताई थी।

सेठ गोविन्द दास ने इंडिया देट इज भारत वाक्य रचना पर असंतोष जताया एवं उस समय एक प्रचलित भ्रम के बारे में भी कहा कि कुछ लोगों को यह भ्रम हो गया है "इंडिया इस देश का पुराना नाम है हमारे सबसे प्राचीन ग्रंथ वेद है और अब तो यह माना जाना लगा है कि वेद संसार के सबसे पुराना ग्रंथ है। वेदों में इंडिया नाम का कोई उल्लेख नहीं मिलता है। ऋग्वेद में ईडयम ईडू और ईडेन्य यह शब्द आए है। यजुर्वेद में इडा शब्द आया है परन्तु इंडिया का इनसे कोई सम्बन्ध नहीं है।

इंडिया शब्द हमारे किसी प्राचीन ग्रन्थ में होकर उस समय से प्रयोग में आने लगा जब से यूनानी भारत में आये। यूनानियों ने हमारी सिन्ध नदी का नाम इंडस रखा और इंडस कहने के साथ इण्डिया शब्द आया। यह बात एन्साइक्लेपीडिया ब्रिटेनिका में भी लिखी है।  उसके विपरीत  यदि हम देखें तो हमको मालूम होता है कि वेदों, उपनिषदों तथा ब्राह्मण ग्रंथों के पश्चात् हमारा सबसे प्राचीन और महान् ग्रन्थ जो महाभारत है, उसमें हमको भारत का नाम मिलता हैः ‘‘अथते कीर्ति पष्यामि, वर्ष भारत भारत’’-भीष्म पर्व

विष्णु पुराण में भी हमें भारत नाम मिलता है। वह इस प्रकारः ‘‘गायन्तिः देवा किल गीत कानि, धन्यास्तु ने भारत भूमि भागे’’ ब्राह्मण्ड पुराण में भी हमें इस देश का नाम भारत ही मिलता है। भरणाच्य प्रजानवै मनुर्भरत उच्यते। निरूक्त वचनाचैव वर्ष तद्भारत स्मृतं। चीनी यात्री इत्सिंग जब भारत आया तो उसने भी अपनी यात्रा वृतान्त में इस देश का नाम भारत ही लिखा था। "

श्री कल्लूर सुब्बा राव (मद्रास : जनरल) ने कहा ‘‘श्रीमान्, मैं भारत का नाम हार्दिक समर्थन करता हूं जो प्राचीन नाम है। भरत नाम ऋग्वेद (ऋग 3, 4, 23.4) में है। उसमें यह कहा गया हैइस इन्द्र भरतस्य पुत्रा इन्द्र, ये भरत के पुत्र हैं। वायुपुराण में भरत की सीमायें दी हुई हैंः

इदं तु मध्यमं चित्रं शुभाशुभ फलोदयम्।

उतरं यतसमुद्रस्य हिम् वत् दक्षिणं यत्।’’ (वायुपुराण . 45-75)

इसका अर्थ यह है कि वह भूमि जो हिमाल्य के दक्षिण में है और समुद्र के उत्तर में है, भरत नाम से पुकारी जाती है। इस कारण भरत नाम बहुत प्राचीन है। इण्डिया नाम सिन्धु (इण्डस नदी) के नाम पर पड़ा है और हम अब पाकिस्तान को हिन्दुस्तान कह सकते है क्यों कि सिन्धु नदी वहां पर है। सिन्द हिन्द हो गया क्यों कि संस्कृत के () का उच्चरण प्राकृत में () हो जाता है। यूनानी हिन्द को इन्द कहते है। एतत्पश्चात् यह ठीक तथा उचित होगा कि हम इण्डिया का भरत के नाम से उल्लेख करें। सेठ गोविन्द दास और अन्य हिन्दी भाषा भाषी मित्रों से मैं निवेदन करूंगा कि भाषा का नाम भी वे भारती रखें। मैं समझता हूं कि हिन्दी के स्थान में भारती रखा जाये क्योंकि भारती का अर्थ सरस्वती है।’’

श्री हरगोविन्द पन्त (यूपी : जनरल) ने कहा ‘‘भारतवर्ष या भारत यह नाम तो हमारे दैनिक धार्मिक संकल्प में कहा जाता है जो नित्य स्नान में भी काम में आता हैः ‘‘जम्बू द्वीपे भरत खण्डे आर्यावर्तेयहीं नहीं, इस नाम को जगत् प्रसिद्ध महाकवि कलिदास ने अपने दो प्रसिद्ध पात्र राजा दुष्यन्त और शकुन्तला के आख्यान में भी प्रयुक्त किया है। राजा दुष्यन्त तथा शकुन्तला के पुत्र का नाम भरत था उनका राज्य भारत कहलाया। इस भारत के विषय में हमारे ग्रंथों में उनकी वीरता का बड़ा रोचक वर्णन आता है। शैशव काल में ही वे सिंह के बच्चों से खेलते थे और उन्हें हरा देते थे। इस आख्यान को सभी लोग अच्छी तरह जानते हैं। तो फिर मेरी समझ में यह बात नहीं आती कि क्यों इस नाम को खुले दिल से ग्रहण किया जाता है।’’

अंत में दिनांक 18 सितम्बर 1949 को देश के नामकरण संस्कार पर भारतीय संविधान के अनुच्छेद एक में निम्न संशोधन स्वीकार कर अंगीकार किया गया है।

भारत अर्थात इंडिया (अंग्रेजी में इंडिया देट इज भारत)




Comments

  1. भारत कहने में कोई संकोच किसी को भी नही होना चाहिए।

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