अर्बन नक्सल विमर्श, सत्ता परिवर्तन और भारतीय संविधान
अर्बन नक्सल विमर्श , सत्ता परिवर्तन और भारतीय संविधान भारतीय संविधान की उद्देशिका के प्रथम शब्द हैं—“हम , भारत के लोग।” ये शब्द भारत की संवैधानिक संप्रभुता के मूल आधार को अभिव्यक्त करते हैं। 26 नवंबर 1949 को अंगीकृत , अधिनियमित और आत्मार्पित तथा 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ हमारा संविधान केवल शासन चलाने का दस्तावेज नहीं , बल्कि राष्ट्र की संप्रभुता , लोकतांत्रिक संस्थाओं , नागरिक स्वतंत्रताओं और विधि के शासन का आधार है।लेकिन एक महत्वपूर्ण प्रश्न उठता है: क्या “हम , भारत के लोग” का अर्थ यह है कि कोई भी व्यक्ति , संगठन अथवा राजनीतिक समूह अपनी इच्छानुसार सत्ता परिवर्तन के लिए संवैधानिक संस्थाओं को दरकिनार कर सकता है ? क्या लोकप्रिय समर्थन का दावा करके निर्वाचित सरकार को हटाने के लिए किसी भी प्रकार के साधनों को उचित ठहराया जा सकता है ? इन प्रश्नों पर गंभीर संवैधानिक विमर्श आवश्यक है। सत्ता परिवर्तन: लोकतांत्रिक अधिकार या संवैधानिक व्यवस्था को चुनौती ? - अक्टूबर 2026 में निर्वाचन आयोग और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण ( SIR) से संबंधित विवादों के बीच सत्ता परिवर्तन की माँग ...