मतदाता सूचियाँ, निर्वाचन आयोग और प्रमाण-आधारित सार्वजनिक विमर्श : तथ्य, आरोप और कानून
मतदाता सूचियाँ , निर्वाचन आयोग और प्रमाण-आधारित सार्वजनिक विमर्श : तथ्य , आरोप और कानून निर्वाचन आयोग के कामकाज से संबंधित प्रश्नों का परीक्षण संविधान , कानून , नियम , आधिकारिक अभिलेख , न्यायिक निर्णय और उपलब्ध प्रमाणों की कसौटी पर किया जाना चाहिए। मतदाता सूचियों , निर्वाचन आयुक्तों , मतदाता विवरणों और तकनीक को लेकर प्रश्न उठते हैं। इसलिए तथ्यों , लगाए गए आरोपों , कानूनी स्थिति और उपलब्ध प्रमाणों को स्पष्ट रूप से अलग-अलग समझना आवश्यक है। तथ्य : मतदाता सूची की शुद्धता - मतदाता सूची की शुद्धता स्वयं एक वैधानिक आवश्यकता है। Representation of the People Act, 1950 में मतदाता के पंजीकरण , सामान्य निवास , एक से अधिक स्थानों पर पंजीकरण तथा त्रुटिपूर्ण या अपात्र प्रविष्टियों के सुधार और विलोपन से संबंधित व्यवस्था है। धारा 19 पंजीकरण का आधार प्रदान करती है। कानून एक व्यक्ति के एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में अथवा एक ही निर्वाचन क्षेत्र में एक से अधिक बार पंजीकरण को रोकता है। धारा 22 के अंतर्गत प्रविष्टि के संशोधन , स्थानांतरण या विलोपन से पहले उचित सत्यापन की आवश्यकता है। अतः अपात्र ...