मौन का शंखनाद
नरेन्द्र तो था निमितमात्र , नरेन्द्र के माध्यम से दिया संदेश मौन का , स्वयं सच्चिदानंद ने। नरेन्द्र के मौन की गूँज सुनी विश्व ने , उस सर्वधर्म सभा में। हुआ सारा संसार नतमस्तक मौन में। अब तो है यह खुला रहस्य , मौन से आए है , मौन में जाना है। बीच का सफर तो मौन का उतार चढ़ाव है। मौन में होता दर्शन ‘‘ सत्य ’’ का स्वामीजी ने दिया यही संदेश सृष्टि का आधार मौन , जगत की अभिव्यक्ति का सार मौन। बुद्ध को देखो शरीर में उतारा मौन , मौन में है विस्फोट , जिसके आगे परमाणु की गूँज भी है फीकी फीकी। स्वामीजी ने बताया संसार को , भारत है विश्वगुरू जिसका मौन है आधार , भारत की प्रगति पर है , विश्व शांति का आधार। स्वामीजी ने सनातन धर्म को समझाया , मौन से शुरू किया मौन पर समापन किया। सनातन धर्म में मौन है प्रथम शर्त , क्योंकि यह मौन नहीं हैं निष्क्रिय , यह मौन है अनंत संभावनाओं की पोटली। स्वामीजी ने बताये , मौन के प्रकार , सत , रज और तम् कहते रूको नही इन तीन प्रकार पर , करो गीता का पाठ , जो कहती-होना है त्रिगुणातीत मौन में भी जाना है त्रिगुणातीत ...