संविधान के रोचक तथा महत्वपूर्ण तथ्य

 



भारत के मूल संविधान (अंग्रेजी) को हस्तलिपिबद्ध/सुलेख  करने का श्रेय प्रेम बिहारी नारायण (सक्सैना) को जाता है और हिन्दी में सुलेखन करने का श्रेय बसंत कृष्ण वैद्य को मिलता है।

भारत के मूल संविधान को हस्तलिपिबद्ध/सुलेख  करने का श्रेय प्रेम बिहारी नारायण (सक्सैना) को जाता है। मूल संविधान को हस्तलिपिबद्ध करने पर मानदेय का प्रस्ताव पं. नेहरू ने दिया था। इस पर प्रेम बिहारी ने मानदेय लेने से इंकार तो किया पर यह शर्त रखी की मूल संविधान के सभी पृष्ठों पर उनका नाम अंकित होगा। अंतिम पेज पर उनका व उनके दादाजी का नाम लिखने की मंशा व्यक्त की। पं. नेहरू ने इस शर्त को सहर्ष स्वीकार किया। मूल संविधान को हस्तलिपिबद्ध करने में पूरे छः महीने का समय लगा। 254 पेन होल्डर निब काम में आए व 303 नम्बर की निब इस कार्य के लिए काम में ली गई। इस कार्य/योगदान के लिए प्रेम बिहारी नारायण (सक्सैना) को पद्मविभूषण सम्मान से सरकार ने सम्मानित किया। देहरादून स्थित भारतीय सर्वेक्षण विभाग कार्यालय द्वारा फोटोलिथोग्राफी का कार्य पूरा किया गया। 

संविधान सभा के सदस्यों के हस्ताक्षर आठवीं अनुसूची के बाद 11 पेजों में फैले हुए है। पहला हस्ताक्षर पं. नेहरू का है। अंतिम हस्ताक्षर फिरोज गांधी का है। सभी सदस्यों के हस्ताक्षर करने के पश्चात् जब मूल संविधान पर हस्ताक्षर के लिए संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को निवेदन किया गया तब उन्होंने हस्ताक्षर के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलने पर अनुच्छेद 8 में अंकित भाषा की सूची व पं. नेहरू के हस्ताक्षर के बीच में सीमित जगह पर तिरछे हस्ताक्षर किए। संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने यह हस्ताक्षर देवनागरी व रोमन लिपि में किए व अबुल कलाम आजाद ने उर्दू व पुरोषोत्तम दास टण्डन ने देवनागरी में हस्ताक्षर किये। इनके अलावा सभी सदस्यों ने हस्ताक्षर अंग्रेजी में किए। महात्मा गांधी के हस्ताक्षर मूल संविधान में नहीं मिलते। 

मूल संविधान भारत के संसद के पुस्तकालय में एक पेटी के अन्दर सुरक्षित रखा गया है जो कि विशेष हिलियम गैस से भरा हुआ है।

मूल संविधान में वैदिक काल के गुरूकुल का दृश्य रामायण से श्रीराम व माता सीता और लक्ष्मण के वनवास से घर वापस आने का दृश्य, श्री कृष्ण द्वारा अर्जून को कुरूक्षेत्र में दिए गए गीता के उपदेश, के दृश्यों को दर्शाया गया। इसी प्रकार गौतम बुद्ध व महावीर के जीवन, सम्राट अशोक व विक्रमादित्य के सभागार के दृश्य मूल संविधान में मिलते है। इसके अलावा अकबर, शिवाजी, गुरूगोबिन्द सिंह, टीपू सुल्तान और रानी लक्ष्मीबाई के चित्र भी मूल संविधान में है। स्वतंत्रता संग्राम के दृश्य को महात्मा गांधी की दाण्डी मार्च से दर्शाया है। इसी प्रकार नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का चित्र मूल संविधान में राष्ट्रवादी क्रांतिकारियों का प्रतिनिधित्व करता है।  

भारत के मूल संविधान की उद्देशिका का कला कार्य ब्योहर राम मनोहर सिन्हा द्वारा किया गया। उद्देशिका पृष्ठ पर ब्योहर राम मनोहर सिन्हा ने अपने नाम के केवल राम शब्द का उपयोग करते हुए हस्ताक्षर किए है। जयपुर के कृपाल सिंह शेखावत ने मूल संविधान में कला कार्य में योगदान दिया। कृपाल सिंह शेखावत को 1974 में पद्मश्री व 2002 में शिल्पगुरू सम्मान से सम्मानित किया गया। कृपाल सिंह शेखावत ने मूल संविधान में कई चित्र बनाये। कृपाल सिंह शेखावत जयपुर में वापस आकर परंपरागत ब्लू पोट्री कला को वापस जिन्दा किया जिसमें जयपुर की महारानी गायत्री देवी ने उन्हें प्रोत्साहित किया। मूल संविधान में कला को देखने पर अजन्ता के भित्ति चित्र याद आने लगते है।


सूर्य प्रताप सिंह राजावत

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