यूनिफार्म सिविल कोड (UCC) - मिथक, भ्रम, विकृत जानकारी ,अफवाह बनाम सत्यता

 

यूनिफार्म सिविल कोड (UCC) मिथक, भ्रम, विकृत जानकारी ,अफवाह बनाम  सत्यता

सोशल मीडिया  में गैर हिन्दू वर्ग  द्वारा यूनिफॉर्म सिविल कोड  को हिंदू राष्ट्र से  जोड़कर समान नागरिक संहिता  विषय को एक नया मोड़  देने का प्रयास किया जा रहा है ।प्रश्न यह है क्या गैर हिन्दू वर्ग    को यूनिफॉर्म सिविल कोड के बारे में  जानकारी  नहीं है ? हम सभी को  को मालूम होना चाहिए कि  यूनिफॉर्म सिविल कोड  स्वतंत्रता सेनानियों और  संविधान सभा की अभीप्सा थी  और  भारतीय संविधान में स्पष्ट रूप से अंकित हैl  यहां तक की यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने के लिए माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी समय-समय पर केंद्र सरकार को  यूनिफार्म सिविल कोड लागू नही करने पर असंतोष और गहरी चिंता जाहिर की है  । परंतु यूनिफॉर्म सिविल कोड पर इस प्रकार की गैर जिम्मेदाराना   टिप्पणी  कई प्रश्न खड़े करती है । भारत की बढ़ रही प्रतिष्ठा को कुछ शक्तियां धूमिल और लांछित करना चाहती हैl  यूनिफॉर्म सिविल कोड  से सम्बंधित मिथक और सही तथ्य और सत्य की जांच अवश्यक है  जैसे –

UCC  और हिन्दू राष्ट्र

1.मिथक -भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने का प्रयास    जब कि सत्य यह है कि यूनिफार्म सिविल कोड संविधान सम्मत् है। (अनुच्छेद 44) UCC Secular देश की नींव होती है, basic structure doctrine of constitution के अंतर्गत सेकुलरिज्म  भारतीय संविधान का अभिन्न अंग है

2. भ्रम -हिन्दू पर्सनल लॉ को सभी पर लागू किया जाएगा जब कि सत्य यह है कि सभी सम्प्रदाय के धर्मग्रन्थों के पर्सनल लॉ का सम्मान UCC का केन्द्र बिन्दू होगा जैसे हिन्दू को  कन्यादान और सप्तपदी, मुस्लिम को निकाह ,सिख  का आनंद कारज समारोह , व अन्य सभी लोग अपने धर्म और परम्पराओं को निभाते हुए विवाह का संस्कार संपन्न कर सकेंगे I

3. झूठी खबर -मनुस्मृति को लागू करना जब कि सत्य यह है कि मनुस्मृति को लागू करना, जैसी बातें करना UCC के विरूद्ध आधारहीन, तथ्यहीन एवं भ्रमित मानसिकता को दर्शाता है।

 UCC और शरिया कानून

1. झूठी खबर-UCC मुस्लिम विरोधी जब कि सत्य यह है कि UCC पर्सनल कानून में महिला और पुरूष के बीच समान अधिकार स्थापित करता है।

2 . भ्रम -शरिया कानून में विवाह की उम्र में बदलाव नही किया जा सकता   जब कि सत्य यह है कि          पुरूष की 21 और महिला की 18, (बांग्लादेश मुस्लिम देश के अनुसार, जोकि इतिहास में भारत के नक्शे में रहे है)

3.मिथक -तलाक में बदलाव शरिया कानून के विपरीत जब कि सत्य यह है कि   मुस्लिम विवाह-विच्छेद अधिनियम 1939 की धारा 2 में पुरूष और महिला को तलाक के लिये समान अधिकार (बांग्लादेश मुस्लिम देश के अनुसार, जोकि इतिहास में भारत के नक्शे में रहे है में यह प्रावधान लागू) I

4.विकृत जानकारी  -बहुविवाह मुस्लिम कानून में प्रतिबंधित नहीं है जब कि सत्य यह है कि     बांग्लादेश और पाकिस्तान, जोकि इतिहास में भारत के नक्शे में रहे है,  में एक से अधिक विवाह करने पर पत्नी की सहमति और कानून की अनुमति आवश्यक हैI

5. अफवाह -महिला को भरण-पोषण शरियत कानून के विपरीत  जब कि सत्य यह है कि कुरान की सही व्याख्या के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय ने शाहबानो प्रकरण में महिला को भरण-पोषण देना सही पाया (सीआरपीसी  की धारा 125) I

6.मिथक -  मुस्लिम उत्तराधिकारी कानून के साथ छेड़छाड़ जब कि सत्य यह है कि इण्डोनेशिया की सर्वोच्च न्यायालय ने कुरान की आयत संख्या 4:176 में वाल्द की व्याख्या संतान से की गई है जिसमें लड़का और लड़की दोनों शामिल है।

7 झूठी खबर -मुस्लिम पर्सनल लॉ में कोई संशोधन नहीं किया जा सकता जब कि सत्य यह है कि संविधान सभा में चर्चा के दौरान डॉ. अम्बेडकर ने स्पष्ट रूप से उदाहरण देते हुए कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में बदलाव नहीं किया जा सकता यह सबसे बड़ा झूठ है।

8. भ्रांतिजनक जानकारी -शरिया कानून मुसलमानों के लिए सर्वोपरि है जब कि सत्य यह है कि भारत में सीआरपीसी  -बीएनएसएस , साक्ष्य अधिनियम-बीएसए , आईपीसी- बीएसएन  आदि कानून का कभी&भी मुस्लिम समुदाय ने विरोध नहीं किया I

डॉ. अम्बेडकर और संविधान सभा

मिथक -डॉ. अम्बेडकर ने संविधान सभा में UCC का विरोध किया था जब कि सत्य यह है किडॉ. अम्बेडकर यूनिफार्म सिविल कोड को लागू करने के पक्ष में थे I

संविधान - मौलिक अधिकार

1.मिथक -पर्सनल लॉ को संविधान में संरक्षण प्राप्त है  जब कि सत्य यह है कि     भारतीय संविधान को मौलिक अधिकारो  के अंतर्गत पर्सनल लॉ को संविधान सम्मत् बनाने पर ही अनुच्छेद 44 को लागू किया जा सकता है I

2. भ्रांतिजनक जानकारी-UCC का अर्थ है - सभी धर्मों पर एक कानून जब कि सत्य यह है कि  UCC का अर्थ है - सभी पर्सनल लॉ में पुरूष और महिला को समानता का अधिकार देना परन्तु धर्मग्रन्थों के मौलिक तत्व को पूरा सम्मान देना I

आदिवासियों  पर प्रभाव

मिथक -आदिवासी लोगों को प्रभावित करेगा जब कि सत्य यह है कि सभी भारतीयों के रिति-रिवाज, परम्परा एवं धर्मग्रन्थों को सम्मान को केन्द्र में रखकर UCC पर विचार किया जाएगाI

सर्वोच्च न्यायालय

मिथक -भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों में यूसीसी नहीं है जब कि सत्य यह है कि  अनेको बार सर्वोच्च न्यायालय ने UCC को लागू नहीं करने के कारण संविधान में प्रदत मौलिक अधिकारों के हनन के लिए भारत सरकार की निंदा की है  I

लॉ कमिशन ऑफ इंडिया 2018 की रिपोर्ट

झूठी खबर -लॉ कमिशन ऑफ इंडिया 2018 की रिपोर्ट में UCC के लिए समय उपयुक्त नहीं बताया जब कि सत्य यह है कि लॉ कमिशन ऑफ इंडिया 2018 की रिपोर्ट  नहीं  है. लॉ  कमीशन का  कंसल्टेटिव पेपर है  इसमें स्पष्ट लिखा है कि सभी पर्सनल लॉ में पुरूष और महिला को समानता का अधिकार देना परन्तु धर्मग्रन्थों के मौलिक तत्व को पूरा सम्मान देना जो कि UCC को लागू करने के लिए प्रथम अनिवार्य शर्त है I

एकरूपता और विविधता

1.मिथक -UCC का अर्थ है – Uniformity (एकरूपता) जब कि सत्य यह है कि एकरूपता नहीं बल्कि पर्सनल लॉ में विविधता एवं धार्मिक ग्रन्थों के मौलिक तत्व को सम्मान देना है, एकरूपता केवल स्त्री और पुरूष के अधिकारों में समानता एवं एकरूपता को इंगित करता है।

2. विकृत जानकारी  -UCC में विविधता नहीं होगी जब कि सत्य यह है कि UCC में विविधता में एकता के आधार पर होगा I

भाषा और संस्कृति

1. भ्रम -UCC से भाषा और संस्कृति को खतरा जब कि सत्य यह है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 29 से 30 भाषा और संस्कृति को संरक्षण प्रदान करते है।

2.मिथक -     UCC और संस्कृति से सम्बन्धित भ्रांति जब कि सत्य यह है कि  UCC का अर्थ है यूनिफार्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) न कि यूनिफार्म कल्चर कोड (Uniform Culture Code)  I

वर्तमान में  भारत में UCC

विकृत जानकारी   -   UCC भारत में लागू नहीं किया जा सकता   जब कि सत्य यह है कि  गोवा , असम और उत्तराखंड  राज्य में UCC  लागू हैI महाराष्ट्र में भी राजस्थान के बाद UCC को ले कर समिति का गठन किया गया है IUCC कानून परराजस्थान राज्य ने  सभी के  बहुमूल्य सुझाव आमंत्रित किये हैं I  कृपया नीति निर्माण में भागीदार बनें। अपने विचार समिति की वेबसाईट  पर साझा करें।   https://ucc.rajasthan.gov.in

 

सूर्य प्रताप सिंह राजावत

अधिवक्ता राजस्थान उच्च  न्यायालय जयपुर

9462294899                                                                                                               

 

Comments

Popular posts from this blog

संविधान के रोचक तथा महत्वपूर्ण तथ्य

Dr. Syama Prasad Mookerjee on Hindi-National Language discussion in Constituent Assembly