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Showing posts from January, 2026

‘‘संविधान जानो’’

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  ‘‘संविधान जानो’’ ‘‘संविधान जानो’’ अभियान को व्यापक और असरदार बनाने के लिए यह   आवश्यक है कि संविधान को न केवल विधि से जोड़कर देखा जाए बल्कि इससे भावनात्मक रूप से भी जुड़े। भावनात्मक रूप से जुड़ने के लिए संविधान से सम्बन्धित रोचक तथ्य जैसे कि अंग्रेजी भाषा में सुलेखन का कार्य प्रेम बिहारी नारायण रायजादा द्वारा किया गया एवं हिन्दी भाषा में बसन्त कृष्ण वैद्य द्वारा सुलेखन का कार्य किया गया , सभी को मालूम होने चाहिए। साथ ही संविधान को खूबसूरत एवं आकर्षक बनाने के लिए सभी पृष्ठों पर चौखट (फ्रेम) का कार्य आचार्य नन्दलाल बोस द्वारा किया गया एवं संविधान के 22 भागों को भारतीय सभ्यता से सम्बन्धित महत्वपूर्ण एवं सारगर्भित विषयों का चित्रण स्वयं नन्द लाल बोस द्वारा किया गया। इन चित्रों जैसे : वैदिककाल , रामायण , महाभारत , अशोक , भागीरथ , छत्रपति शिवाजी महाराज , गुरूगोविन्दसिंह , महात्मा गांधी , नेताजी सुभाषचन्द्र बोस आदि के माध्यम से आज के भारत को न केवल संविधान सभा की दूरदर्शिता से जुड़ाव होगा बल्कि भारतीय संस्कृति , सभ्यता और विरासत के महत्वपूर्ण आयामों की जानकारी भी सरल एवं सहज रूप से...

मौलिक कर्तव्यों में राष्ट्रीय गीत सम्मिलित करें

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  मौलिक कर्तव्यों में राष्ट्रीय गीत सम्मिलित करें संविधान सभा में बहस के दौरान डॉ . आंबेडकर ने संवैधानिक नैतिकता के बारे में कहा था   कि किसी भी देश के नागरिकों में संवैधानिक नैतिकता का समावेश होना आवश्यक है। वास्तव में , संवैधानिक नैतिकता मौलिक कर्तव्यों के सिद्धांत से कहीं अधिक है। मौलिक कर्तव्यों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51A में वर्णित किया जा सकता है। दूसरी और , संवैधानिक नैतिकता संविधान में आस्था को समाहित करती है। संवैधानिक नैतिकता का एक अन्य पहलू विधि के शासन के प्रति सम्मान   है। भारत में संसद और राज्य विधानमंडलों जैसे विधायिकाओं द्वारा बनाए गए कानूनों का पालन करने में विधि के शासन के प्रति सम्मान परिलक्षित होता है। इस पृष्ठभूमि में यह उल्लेख करना महत्वपूर्ण है कि भारत के नागरिक को राष्ट्रगान - जन गण मन गाने में गर्व महसूस होता है। भारत के संविधान के भाग IV- क में मौलिक कर्तव्यों की भावना को कायम रखते हुए , अनुच्छेद 51 ए ( ए ) में भारत के प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य संविधान का पालन करना और उसके आदर्शों और संस्थानों , राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रगान का सम्म...

रोहिंग्या मुद्दे पर CJI बधाई के पात्र हैं

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  रोहिंग्या मुद्दे पर CJI बधाई के पात्र हैं   “क्या हम रोहिंग्या लोगों का रेड कार्पेट पर स्वागत करें ?” भारत के मौजूदा चीफ जस्टिस सूर्यकांत कुमार ने हाल ही में बंदी प्रत्यक्षीकरण ( habeas corpus ) याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता से यह सवाल पूछा। यह चिंता मानवीय मुद्दों और अंतर्राष्ट्रीय कानून से निपटते समय संवैधानिक नैतिकता के मुद्दे के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे को भी दिखाती है। भारत का संविधान भारत के नागरिकों और उन लोगों के मौलिक अधिकारों को मान्यता देता है जो भारत के नागरिक नहीं हैं लेकिन भारत के कानूनी ढांचे के भीतर कानूनी दर्जा रखते हैं। कुछ खास कानूनी प्रावधान हैं जो नागरिकता के मुद्दे से निपटते हैं , जैसे कि भारत के संविधान के भाग दो के तहत अनुच्छेद 5 , 6 , 7 , 8 और 9 , जो 26 नवंबर 1949 से ही लागू हैं। यह भारत के नागरिक की स्थिति और अधिकारों के महत्व और दायरे को दर्शाता है। भारत के संविधान के भाग तीन के तहत अनुच्छेद 32 राज्य के खिलाफ मौलिक अधिकार को लागू करने के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने का मौलिक अधिकार प्रदान करता है। बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका अ...