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Showing posts from January, 2026

UAPA- jail to mastermind and bail to minion

  UAPA- jail to mastermind and bail to minion     Recently a larger conspiracy case related to year 2020 Delhi riots which is reported to have claimed 54 lives     is much in debate on account of non grant of bail to two   accused   Umar Khalid and Sharjeel Imam having being served chart sheet under the offence of UAPA, IPC and other law. It might have got unnoticed in social media, but a panel of senior advocate of     Dushyant Dave , retired   Justice   Madan B Lokur and Justice Sudhanshu Dhulia retired with moderator senior advocate Kapil Sibbal . All are associated with Supreme Court . Kapil Sibbal   made viral this panel discussion   which raises   many questions and   allegations as much as the debate was dented by narrative to the effect that    if kapil Sibbal   does not secure bail for his client , then the bench is not good. Panel had the audacity to say that such an important case sh...

संविधान और संविधान सभा में भारतीय विरासत

  संविधान और   संविधान सभा   में भारतीय विरासत संविधान सभा में बहस के समय वेद , पुराण , उपनिषद , रामायण , महाभारत , स्मृतियों , , शंकराचार्य , तुलसीदास , सूरदास ,   स्वामी विवेकानंद , महर्षि अरविंद , आदि का स्मरण किया गया था | स्वतंत्रता   ( liberty) , समानता     ( equality),    बंधुत्व ( fraternity) , न्याय ( justice) शब्द भाषा की दृष्टि से नए हो सकते   हैं परन्तु भारतीय परंपरा और राजनीती में न्याय , समानता , स्वतंत्रता , बंधुत्व का उल्लेख मिलता है | संविधान सभा की चर्चा इस पक्ष को समझने में सार्थक है | उद्देश्य संकल्प ( objective resolution ) से लेकर अंतिम वाचन ( third reading ) तक स्पष्ट होता है कि भारतीय विधि शास्त्र , शासन के सिद्धांत समृद्ध है , युगधर्म के अनुसार संस्थाओं का निर्माण वैदिक   ज्ञान - आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः के   अनुसार     ही किया है   | गणतंत्र के 76 वर्ष को इमानदारी से समझने के लिए संविधान सभा की डिबेट्स का अध्यन अपरिहार्य है | जिससे हम भारत के लोग समझ सके कि संविधान सभा क...

‘‘संविधान जानो’’

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  ‘‘संविधान जानो’’ ‘‘संविधान जानो’’ अभियान को व्यापक और असरदार बनाने के लिए यह   आवश्यक है कि संविधान को न केवल विधि से जोड़कर देखा जाए बल्कि इससे भावनात्मक रूप से भी जुड़े। भावनात्मक रूप से जुड़ने के लिए संविधान से सम्बन्धित रोचक तथ्य जैसे कि अंग्रेजी भाषा में सुलेखन का कार्य प्रेम बिहारी नारायण रायजादा द्वारा किया गया एवं हिन्दी भाषा में बसन्त कृष्ण वैद्य द्वारा सुलेखन का कार्य किया गया , सभी को मालूम होने चाहिए। साथ ही संविधान को खूबसूरत एवं आकर्षक बनाने के लिए सभी पृष्ठों पर चौखट (फ्रेम) का कार्य आचार्य नन्दलाल बोस द्वारा किया गया एवं संविधान के 22 भागों को भारतीय सभ्यता से सम्बन्धित महत्वपूर्ण एवं सारगर्भित विषयों का चित्रण स्वयं नन्द लाल बोस द्वारा किया गया। इन चित्रों जैसे : वैदिककाल , रामायण , महाभारत , अशोक , भागीरथ , छत्रपति शिवाजी महाराज , गुरूगोविन्दसिंह , महात्मा गांधी , नेताजी सुभाषचन्द्र बोस आदि के माध्यम से आज के भारत को न केवल संविधान सभा की दूरदर्शिता से जुड़ाव होगा बल्कि भारतीय संस्कृति , सभ्यता और विरासत के महत्वपूर्ण आयामों की जानकारी भी सरल एवं सहज रूप से...