भारत रत्न अमर्त्य सेन की यूनिफार्म सिविल कोड पर टिप्पणी- संवैधानिक नैतिकता के विपरीत

 अमर्त्य सेन ने  यूनिफॉर्म सिविल  कोड पर जो टिप्पणी की है , उससे पता चलता है कि  भारत रत्न से सम्मानित एवं नोबेल पुरस्कार  विजेता  व्यक्ति भी यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर बहुत   ज्यादा भ्रमित है     अमर्त्य सेन द्वारा यूनिफॉर्म सिविल कोड  को हिंदू राष्ट्र से  जोड़कर समान नागरिक संहिता  विषय को एक नया मोड़  देने का प्रयास किया जा रहा है

प्रश्न यह है क्या अमर्त्य सेन को यूनिफॉर्म सिविल कोड के बारे में  जानकारी  नहीं है ? अमर्त्य सेन जैसे व्यक्तित्व  को अज्ञानता  का लाभ नहीं दिया जा सकता  अमर्त्य सेन को मालूम होना चाहिए यूनिफॉर्म सिविल कोड  स्वतंत्रता सेनानियों संविधान सभा की अभीप्सा थी  और  भारतीय संविधान में स्पष्ट रूप से अंकित है.

 यहां तक की यूनिफॉर्म सिविल कोड को लागू करने के लिए ​​माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने भी समय-समय पर केंद्र सरकार को  यूनिफार्म सिविल कोड लागू नही करने पर असंतोष और गहरी चिंता जाहिर की है .अमर्त्य सेन की टिप्पणी ना केवल गैर जिम्मेदाराना  है बल्कि संवैधानिक नैतिकता के मूल्यों  के विपरीत है अमर्त्य सेन को यह समझना चाहिए कि उनकी टिप्पणी को विश्व पटल पर गम्भीर से  जाता है परंतु यूनिफॉर्म सिविल कोड पर इस प्रकार की गैर जिम्मेदाराना   टिप्पणी  कई प्रश्न खड़े करती है । भारत की बढ़ रही प्रतिष्ठा को कुछ शक्तियां धूमिल और लांछित करना चाहती है, श्री अमर्त्य सेन उसका जाने अनजाने उसका हिस्सा बन गए हैं .

यूनिफार्म सिविल कोड (UCC) - मिथक, तथ्य-सत्य

क्र.सं.

मिथक

तथ्य-सत्य

1.

भारत को हिन्दू राष्ट्र बनाने का प्रयास

यूनिफार्म सिविल कोड संविधान सम्मत् है। (अनुच्छेद 44) UCC Secular देश की नींव होती है, basic structure doctrine of constitution के अंतर्गत सेकुलरिज्म  भारतीय संविधान का अभिन्न अंग है

2.

UCC मुस्लिम विरोधी

UCC पर्सनल कानून में महिला और पुरूष के बीच समान अधिकार स्थापित करता है।

3.

हिन्दू पर्सनल लॉ को सभी पर लागू किया जाएगा

सभी सम्प्रदाय के धर्मग्रन्थों के पर्सनल लॉ का सम्मान UCC का केन्द्र बिन्दू होगा

4.

मनुस्मृति को लागू करना

मनुस्मृति को लागू करना, जैसी बातें करना UCC के विरूद्ध आधारहीन, तथ्यहीन एवं भ्रमित मानसिकता को दर्शाता है।

                               5.

शरिया कानून में विवाह की उम्र में बदलाव

पुरूष की 21 और महिला की 18, (बांग्लादेश मुस्लिम देश के अनुसार, जोकि इतिहास में भारत के नक्शे में रहे है)

6.

तलाक में बदलाव शरिया कानून के विपरीत

मुस्लिम विवाह-विच्छेद अधिनियम 1939 की धारा 2 में पुरूष और महिला को तलाक के लिये समान अधिकार (बांग्लादेश मुस्लिम देश के अनुसार, जोकि इतिहास में भारत के नक्शे में रहे है में यह प्रावधान लागू)

7.

बहुविवाह मुस्लिम कानून में प्रतिबंधित नहीं है

बांग्लादेश और पाकिस्तान, जोकि इतिहास में भारत के नक्शे में रहे है,  में एक से अधिक विवाह करने पर पत्नी की सहमति और कानून की अनुमति आवश्यक है

8.

महिला को भरण-पोषण शरियत कानून के विपरीत

कुरान की सही व्याख्या के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय ने शाहबानो प्रकरण में महिला को भरण-पोषण देना सही पाया (सीआरपीसी  की धारा 125)

9.

उत्तराधिकारी कानून के साथ छेड़छाड़

इण्डोनेशिया की सर्वोच्च न्यायालय ने कुरान की आयत संख्या 4:176 में वाल्द की व्याख्या संतान से की गई है जिसमें लड़का और लड़की दोनों शामिल है।

10.

डॉ. अम्बेडकर ने संविधान सभा में UCC का विरोध किया था

डॉ. अम्बेडकर यूनिफार्म सिविल कोड को लागू करने के पक्ष में थे

11.

पर्सनल लॉ को संविधान में संरक्षण प्राप्त है

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 19, 21, 25 26 के अंतर्गत पर्सनल लॉ को संविधान सम्मत् बनाने पर ही अनुच्छेद 44 को लागू किया जा सकता है

12.

आदिवासी लोगों को प्रभावित करेगा

सभी भारतीयों के रिति-रिवाज, परम्परा एवं धर्मग्रन्थों को सम्मान को केन्द्र में रखकर UCC पर विचार किया जाएगा

13.

भारतीय संविधान के मौलिक अधिकारों में यूसीसी नहीं है

अनेको बार सर्वोच्च न्यायालय ने UCC को लागू नहीं करने के कारण संविधान में प्रदत मौलिक अधिकारों के हनन के लिए भारत सरकार की निंदा की है  

14.

UCC का अर्थ है - सभी धर्मों पर एक कानून

UCC का अर्थ है - सभी पर्सनल लॉ में पुरूष और महिला को समानता का अधिकार देना परन्तु धर्मग्रन्थों के मौलिक तत्व को पूरा सम्मान देना

15.

लॉ कमिशन ऑफ इंडिया 2018 की रिपोर्ट में UCC के लिए समय उपयुक्त नहीं बताया

लॉ कमिशन ऑफ इंडिया 2018 की रिपोर्ट  नहीं  है. लॉ  कमीशन का  कंसल्टेटिव पेपर है  इसमें स्पष्ट लिखा है कि सभी पर्सनल लॉ में पुरूष और महिला को समानता का अधिकार देना परन्तु धर्मग्रन्थों के मौलिक तत्व को पूरा सम्मान देना जो कि UCC को लागू करने के लिए प्रथम अनिवार्य शर्त है

16.

UCC का अर्थ है – Uniformity (एकरूपता)

एकरूपता नहीं बल्कि पर्सनल लॉ में विविधता एवं धार्मिक ग्रन्थों के मौलिक तत्व को सम्मान देना है, एकरूपता केवल स्त्री और पुरूष के अधिकारों में समानता एवं एकरूपता को इंगित करता है। 

17.

UCC में विविधता नहीं होगी

UCC में विविधता में एकता के आधार पर होगा

18.

मुस्लिम पर्सनल लॉ में कोई संशोधन नहीं किया जा सकता

संविधान सभा में चर्चा के दौरान डॉ. अम्बेडकर ने स्पष्ट रूप से उदाहरण देते हुए कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ में बदलाव नहीं किया जा सकता यह सबसे बड़ा झूठ है।

19.

शरिया कानून मुसलमानों के लिए सर्वोपरि है

भारत में सीआरपीसी] साक्ष्य अधिनियम] आईपीसी आदि कानून का कभी&भी मुस्लिम समुदाय ने विरोध नहीं किया

20.

UCC से भाषा और संस्कृति को खतरा

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 28 से 30 भाषा और संस्कृति को संरक्षण प्रदान करते है।

21.

UCC भारत में लागू नहीं किया जा सकता

गोवा राज्य में UCC पहले से ही लागू है

22.

UCC और संस्कृति से सम्बन्धित भ्रांति

UCC का अर्थ है यूनिफार्म सिविल कोड (Uniform Civil Code) न कि यूनिफार्म कल्चर कोड (Uniform Culture Code)

23.

Uniform Criminal Code Lohdkj ijUrq Uniform Civil Code ij fojks/k

भारत में सीआरपीसी] साक्ष्य अधिनियम] आईपीसी आदि कानून का कभी&भी मुस्लिम समुदाय ने विरोध नहीं किया जो कि Uniform Civil Code की श्रेणी में आता है, अतः Uniform Culture Code पर भी तर्क] तथ्य] संविधान के आधार पर संवाद अपेक्षित है।

24.

लॉ कमिशन ऑफ इंडिया 2023 द्वारा सुझाव मांगे है अथवा UCC का Draft

द्वारा सुझाव मांगे है अथवा UCC का Draft लॉ कमिशन ऑफ इंडिया 2023 द्वारा सुझाव मांगे है। UCC संविधान में प्रदत प्रावधानों एवं प्रक्रिया के अनुसार संसद द्वारा बनाया जाएगा।

 

 


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