संविधान और संविधान सभा में भारतीय विरासत
संविधान और संविधान सभा में भारतीय विरासत संविधान सभा में बहस के समय वेद , पुराण , उपनिषद , रामायण , महाभारत , स्मृतियों , , शंकराचार्य , तुलसीदास , सूरदास , स्वामी विवेकानंद , महर्षि अरविंद , आदि का स्मरण किया गया था | स्वतंत्रता ( liberty) , समानता ( equality), बंधुत्व ( fraternity) , न्याय ( justice) शब्द भाषा की दृष्टि से नए हो सकते हैं परन्तु भारतीय परंपरा और राजनीती में न्याय , समानता , स्वतंत्रता , बंधुत्व का उल्लेख मिलता है | संविधान सभा की चर्चा इस पक्ष को समझने में सार्थक है | उद्देश्य संकल्प ( objective resolution ) से लेकर अंतिम वाचन ( third reading ) तक स्पष्ट होता है कि भारतीय विधि शास्त्र , शासन के सिद्धांत समृद्ध है , युगधर्म के अनुसार संस्थाओं का निर्माण वैदिक ज्ञान - आ नो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः के अनुसार ही किया है | गणतंत्र के 76 वर्ष को इमानदारी से समझने के लिए संविधान सभा की डिबेट्स का अध्यन अपरिहार्य है | जिससे हम भारत के लोग समझ सके कि संविधान सभा क...